पूर्व नौसेना प्रमुख विष्णु भागवत, प्रशांत भूषण और प्रकाश राज समेत कई प्रमुख हस्तियों के हस्ताक्षर; ECINet के स्वतंत्र ऑडिट की भी मांग
नई दिल्ली। SIR 2026: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद के बीच देश के 2 हजार से ज्यादा नागरिकों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों को खुला पत्र भेजा है। पत्र में SIR की वैधता और प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा पूरी होने तक इस पर रोक लगाने तथा निर्वाचन आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई की मांग की गई है।
पत्र पर पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, इतिहासकार आदित्य मुखर्जी और अभिनेता प्रकाश राज समेत शिक्षाविदों, वकीलों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पूर्व अधिकारियों के हस्ताक्षर बताए गए हैं। पत्र में ECINet की स्वतंत्र जांच और मतदाता पंजीकरण से जुड़े सॉफ्टवेयर तथा फॉर्म में कथित बदलावों की जांच की मांग भी की गई है। ये आरोप पत्र भेजने वालों के हैं और स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं हैं।
ECINet के स्वतंत्र ऑडिट की मांग
पत्र में निर्वाचन आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet की सुरक्षा और कानूनी स्थिति की स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही मतदाता डेटा के कथित केंद्रीकरण, फॉर्म में बदलाव और सॉफ्टवेयर से जुड़ी प्रक्रियाओं की जांच की मांग उठाई गई है।
यह मांग ऐसे समय आई है जब निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद ECINet की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित करने और उसमें IIT/IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल करने का फैसला किया है। आयोग ने कहा है कि ECINet की व्यवस्था को कानून और नियमों के अनुरूप होने की दोबारा जांच की जाएगी।
SIR पर चुनाव आयोग ने किए कई अहम फैसले
SIR को लेकर उठे सवालों के बीच निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर की बैठक में कई फैसले किए। आयोग के मुताबिक, जिन मतदाताओं को अनमैप्ड या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के आधार पर नोटिस दिया गया है, उनके घर जाकर बूथ लेवल अधिकारी दस्तावेज एकत्र कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर सुनवाई ऑनलाइन कराने की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी।
आयोग ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े आदेश आयोग के तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से मंजूर किए गए थे। EC के अनुसार, Form-6 में SIR के लिए लगाए गए घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।
नाम छूटने पर आवेदन का विकल्प
निर्वाचन आयोग के मुताबिक SIR के दौरान जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने जरूरतमंद वर्गों के लिए सहायता केंद्र और विशेष शिविर लगाने के निर्देश भी दिए हैं। दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद को लेकर भी विवाद
SIR के साथ निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्ति जताई थी। आयोग ने इसके जवाब में कहा कि दोनों आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी से संबंधित थे और संबंधित कार्य-पुनर्वितरण आदेश लागू ही नहीं हुए थे।
SIR की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट पहले दे चुका है फैसला
यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जा रहे SIR की वैधता को बरकरार रखा था। कोर्ट ने कहा था कि निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का अधिकार है। ऐसे में अब 2 हजार से ज्यादा नागरिकों का पत्र मौजूदा SIR प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की न्यायिक समीक्षा की मांग के रूप में सामने आया है।


