नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर विजयादशमी पर आयोजित कार्यक्रम में सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारत को विश्व गुरु बनाने के संकल्प पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को साकार करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी देश की नई पीढ़ी पर है।
भागवत ने युवाओं में बढ़ती नशे की लत पर चिंता जताते हुए माता-पिता से बच्चों को अच्छे संस्कार देने की अपील की। साथ ही उन्होंने ओटीटी मंचों और इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री के लिए जरूरी नियम बनाने की आवश्यकता भी बताई।
तकनीक का इस्तेमाल सही दिशा में हो
मोहन भागवत ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने की चर्चा लंबे समय से होती रही है, लेकिन इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए आने वाली पीढ़ी को तैयार करना जरूरी है। बच्चों और युवाओं में जिम्मेदारी, विवेक और सही दृष्टिकोण विकसित करना समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के अनेक फायदे हैं और उसके विस्तार को रोका नहीं जा सकता। हालांकि, ज्ञान और तकनीक अपने आप में केवल साधन हैं। उनका वास्तविक महत्व इस बात पर निर्भर करता है कि उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य और किस दिशा में किया जाता है। इसलिए युवाओं को तकनीक का विवेकपूर्ण और सकारात्मक उपयोग करना सिखाना होगा।
ओटीटी और इंटरनेट सामग्री पर नियम बनाने की जरूरत
संघ प्रमुख ने इंटरनेट और ओटीटी मंचों पर उपलब्ध सामग्री को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी कई बार विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली जानकारी को बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लेती है। ऐसे में उनके लिए सही और गलत के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।
भागवत ने कहा कि दुनिया के कई देशों ने ऐसी सामग्री के दुष्परिणामों को देखते हुए नियम और प्रतिबंध लागू किए हैं। भारत में भी इस दिशा में प्रभावी व्यवस्था बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ओटीटी मंचों की सामग्री को लेकर समाज में चिंता है और शासन-प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
युवाओं में नशे की लत गंभीर चिंता
मोहन भागवत ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को देश की गंभीर समस्याओं में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि सही सोच और समझ के अभाव में युवा तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार, प्रशासन और समाज को मिलकर समय रहते प्रभावी कदम उठाने होंगे।
उन्होंने माता-पिता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार देना और उन्हें सही-गलत का अंतर समझाना जरूरी है। परिवार का मार्गदर्शन युवाओं को गलत आदतों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
दुनिया की समस्याओं का समाधान भारतीय संस्कृति में
संघ प्रमुख ने कहा कि आज दुनिया विकास की दौड़ के साथ पर्यावरण संरक्षण की चुनौती का भी सामना कर रही है। विभिन्न समुदायों, विचारों और संस्कृतियों के बीच समन्वय स्थापित करना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
उन्होंने भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया के सामने मौजूद अनेक समस्याओं के समाधान के लिए भारत की प्राचीन चिंतन परंपरा मार्गदर्शन दे सकती है। भारत को विश्व गुरु बनाने का उद्देश्य केवल आर्थिक और तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को भी मजबूत करना है।


