भोपाल।Caste Certificate Case : मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत होकर आरक्षण का लाभ लेने और जाति प्रमाणपत्र से जुड़ी शिकायत के मामले में पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने कार्रवाई की है। शिकायत की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय भोपाल में निवृतमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी समेत संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
यह मामला राघौगढ़, जिला गुना निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है।
उच्च स्तरीय समिति ने जाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किया
मामले से संबंधित जाति प्रमाणपत्र की जांच मध्यप्रदेश शासन की अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति, भोपाल ने की थी। समिति की जांच के बाद क्षेत्र संयोजक, आदिम जाति कल्याण, विदिशा द्वारा वर्ष 1984 में जारी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित अधिकारी के पक्ष में वर्ष 1984 में विदिशा जिले से अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र जारी किया गया था। उपलब्ध रिकॉर्ड में संबंधित अधिकारी के मूल निवासी होने से जुड़े तथ्यों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं।
शिक्षक की नौकरी में OBC, MPPSC में ST वर्ग का दावा
पुलिस की प्रारंभिक विवेचना में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह तथ्य सामने आया है कि पुलिस सेवा में नियुक्ति से पहले संबंधित अधिकारी ने मध्यप्रदेश में शासकीय शिक्षक के रूप में सेवा के दौरान स्वयं को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत किया था।
इसके बाद मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्ति हुई और बाद में शासकीय सेवा में पदोन्नति सहित अन्य सेवा लाभ प्राप्त किए गए।
प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया से जुड़े तत्कालीन दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका के संबंध में भी तथ्य सामने आए हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में तत्कालीन अधिकारियों ने नियमों और उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुरूप कार्रवाई की थी या नहीं।
IPC और SC-ST एक्ट की धाराओं में केस
उपलब्ध तथ्यों और जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर 18 सितंबर 2026 को थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय भोपाल में भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120-बी, 167 और 420 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(q) के तहत संबंधित व्यक्तियों एवं अन्य के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।
पुलिस दस्तावेजों, संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की विवेचना कर रही है। विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।


