भोपाल। MP Monsoon 2026: मध्य प्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है, लेकिन जाते-जाते प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार 18 से 21 सितंबर तक मध्य प्रदेश में बारिश, गरज-चमक और आंधी की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। प्रदेश में अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद 32 जिलों में बारिश सामान्य से कम है।
मौसम विभाग के अनुसार मानसून की विदाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होने का अनुमान है। इसकी शुरुआत पश्चिमी राजस्थान से हो सकती है। इसके बाद मध्य प्रदेश में भी मानसून की सक्रियता धीरे-धीरे कम होने लगेगी। ऐसे में अगले चार-पांच दिन होने वाली बारिश उन जिलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां अभी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे है।
18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
प्रदेश के 18 जिलों में अब तक सामान्य या सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं।
इसके विपरीत इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 32 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। प्रदेश में आलीराजपुर की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है, जहां सामान्य बारिश की करीब आधी ही बारिश हुई है। वहीं निवाड़ी में सामान्य से 54 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है।
अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक मौसम प्रणालियां सक्रिय
मौसम विभाग के मुताबिक सौराष्ट्र और उससे लगे उत्तर-पूर्वी अरब सागर के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है।
इसके अलावा मानसून ट्रफ राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। इन मौसम प्रणालियों के कारण मध्य भारत में लगातार नमी पहुंच रही है। इसी वजह से 18 और 19 सितंबर को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश के दौर जारी रहने के आसार हैं।
19 सितंबर के बाद नया सिस्टम बनने के संकेत
मौसम विभाग के अनुसार 19 सितंबर के बाद एक और मौसम प्रणाली सक्रिय हो सकती है। उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम तक उत्तर अंडमान सागर के आसपास पहुंच सकता है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम उत्तर अंडमान सागर में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।
इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ने के संकेत हैं। इस मौसम प्रणाली का असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ सकता है और प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।
भोपाल समेत कई जिलों में तेज बारिश
गुरुवार को भोपाल, सीहोर और देवास समेत कई स्थानों पर तेज बारिश हुई। भोपाल में दोपहर के समय करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई। आष्टा में भी मूसलधार बारिश दर्ज की गई।
भोपाल-इंदौर रोड पर सोनकच्छ में बारिश के दौरान कुछ देर के लिए दिन में ही अंधेरा छा गया। वाहन चालकों को सुरक्षा के लिए हेडलाइट जलाकर वाहन चलाने पड़े। ग्वालियर में भी दिनभर की उमस के बाद शाम को हुई बारिश से लोगों को राहत मिली।
32 जिलों में अब भी बारिश की कमी
प्रदेश के 32 जिलों में सामान्य से 4 से 50 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई है। हालांकि पिछले सप्ताह हुई बारिश के कारण कई जिलों में बारिश की कमी का आंकड़ा कम हुआ है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग की स्थिति अब सामान्य के करीब पहुंच गई है।
बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4 से 25 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।
मानसून की विदाई से पहले अगले कुछ दिन होने वाली बारिश इन जिलों के बारिश के आंकड़े को और सुधार सकती है।


