बालाघाट में सर्राफा व्यापारियों से लूट का खुलासा, अंतरराज्यीय गैंग के 3 सदस्य गिरफ्तार
भोपाल। Balaghat Robbery : मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में सर्राफा व्यापारियों से लूट की दो वारदातों का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने अंतरराज्यीय ‘ऐरागोल्ला गैंग’ के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 22 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए हैं। आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने 65 दिनों तक पांच राज्यों के 21 जिलों में सघन तलाश अभियान चलाया। इस दौरान 14 पुलिस टीमों ने करीब 22,270 किलोमीटर की यात्रा की।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, आरोपियों की पहचान और आवाजाही का पता लगाने के लिए तकनीकी साक्ष्यों के साथ मैदानी स्तर पर व्यापक जांच की गई। पुलिस ने 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और 6,24,588 टेलीफोन रिकॉर्ड का तकनीकी विश्लेषण किया। अभियान के दौरान 190 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई। विभिन्न राज्यों की छह जेलों में बंद आरोपियों से भी जानकारी जुटाई गई।
रेकी के बाद सर्राफा व्यापारियों को बनाया निशाना
लूट की पहली वारदात 5 अगस्त 2026 को किरनापुर थाना क्षेत्र के रजेगांव में हुई थी। दुकान बंद कर सोने-चांदी के आभूषणों से भरे दो बैग लेकर घर जा रहे सर्राफा व्यापारी को मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने रास्ते में रोक लिया और दोनों बैग लूटकर फरार हो गए।
दूसरी वारदात 28 अगस्त 2026 को लांजी थाना क्षेत्र में हुई। यहां भी दुकान बंद कर आभूषण और नकदी लेकर घर लौट रहे सर्राफा व्यापारी को बदमाशों ने निशाना बनाया।
आरोपियों ने उसकी मोटरसाइकिल रोकी, मारपीट की और आभूषण व नकदी से भरे दोनों थैले लूट लिए।
सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच से मिला सुराग
पुलिस टीमों ने घटनास्थलों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने के बाद संभावित रास्तों पर आरोपियों की गतिविधियों का मिलान किया। रजेगांव से रायपुर और ओडिशा के संबलपुर सहित विभिन्न स्थानों के फुटेज का समय-क्रम के आधार पर विश्लेषण किया गया।
साइबर सेल ने घटनास्थलों और संभावित मार्गों से जुड़े मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच की। संदिग्ध नंबरों की गतिविधियों, सोशल मीडिया और अन्य उपलब्ध सूचनाओं को जोड़कर आरोपियों की पहचान और उनके ठिकानों का पता लगाया गया। इसके बाद छत्तीसगढ़ और ओडिशा में दबिश देकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पहचान छिपाने के लिए अपनाते थे कई तरीके
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य सर्राफा व्यापारियों की गतिविधियों की पहले से रेकी करते थे। वारदात के दौरान बिना नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल किया जाता था। पहचान छिपाने के लिए आरोपी हेलमेट पहनते, कपड़े बदलते और रास्ते में मोटरसाइकिल तक बदल लेते थे। वारदात के बाद वे दूरस्थ स्थानों की ओर निकल जाते थे।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य डिजिटल पहचान से बचने के लिए व्यक्तिगत सिम कार्ड और नियमित मोबाइल फोन का सीमित इस्तेमाल करते थे। इससे उनकी पहचान और आवाजाही का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया था।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बालाघाट की दोनों वारदातों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। ओडिशा और अन्य राज्यों में हुई समान प्रकृति की घटनाओं के संबंध में भी उनसे पूछताछ की जा रही है। दोनों मामलों में करीब 22 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण जब्त किए गए हैं।
14 टीमों ने चलाया अभियान
बालाघाट पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में 5 अगस्त से 8 अक्टूबर 2026 तक चले अभियान में 76 पुलिसकर्मियों ने कुल 149 दिवस मैदानी कार्य किया। पुलिस ने तकनीकी निगरानी, सीसीटीवी फुटेज, टेलीफोन रिकॉर्ड और अंतरराज्यीय समन्वय के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई। पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई से संगठित अपराधों की जांच में तकनीक और मैदानी सूचना तंत्र के संयुक्त इस्तेमाल की अहमियत सामने आई है।


