Tattoo Culture India: कभी अपराध, नशे और अंडरग्राउंड संस्कृति से जोड़कर देखा जाने वाला टैटू अब भारत में पहचान, भावनाओं और व्यक्तिगत कहानियों को अभिव्यक्त करने का माध्यम बनता जा रहा है। टैटू कलाकार और एलियंस टैटू के संस्थापक सनी भानुशाली के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में टैटू को लेकर समाज की सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब इसे रचनात्मक कला और सम्मानजनक करियर के तौर पर भी देखा जाने लगा है।
भानुशाली ने बताया कि जब उन्होंने टैटू इंडस्ट्री में कदम रखा था, तब टैटू कलाकारों को लेकर लोगों की धारणा अलग थी। उन्हें अपराध और नशे से जोड़कर देखा जाता था। टैटू कलाकारों की एक खास छवि बनी हुई थी, जिसमें अलग तरह के कपड़े, पियर्सिंग और ड्रेडलॉक्स जैसे लुक शामिल थे। हालांकि, समय के साथ यह धारणा बदली है। फिल्मी सितारों और क्रिकेटरों के टैटू बनवाने से भी इस कला को मुख्यधारा में पहचान मिली।
महिलाओं और युवाओं में बढ़ा क्रेज
भानुशाली के अनुसार, टैटू बनवाने वाली महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनके स्टूडियो में पहले करीब 10 प्रतिशत महिलाएं टैटू बनवाने आती थीं, जबकि अब यह आंकड़ा लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। Gen Z भी टैटू को लेकर पहले की तुलना में अधिक सहज नजर आती है।
हर टैटू के पीछे एक कहानी
भानुशाली के मुताबिक, करीब 99 प्रतिशत टैटू किसी न किसी व्यक्तिगत कहानी, याद या भावना से जुड़े होते हैं। लोग जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव, किसी उपलब्धि, रिश्ते या खास स्मृति को स्थायी रूप से दर्ज करने के लिए टैटू बनवाते हैं। उनके अनुसार, टैटू में डिजाइन और फैशन से ज्यादा उसका भावनात्मक अर्थ महत्वपूर्ण होता है।
2026 में मिनिमल और भारतीय डिजाइन पसंद
2026 में मिनिमल टैटू का चलन बढ़ा है। मिनिमल का मतलब केवल छोटा टैटू नहीं, बल्कि साफ-सुथरे और कम जटिल डिजाइन से है। धार्मिक टैटू में भगवान शिव से जुड़े डिजाइन लोकप्रिय हैं। इसके अलावा देवी-देवताओं, भारतीय धार्मिक प्रतीकों, पौराणिक कथाओं और इतिहास से प्रेरित डिजाइन भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
टैटू की लोकप्रियता बढ़ने के बावजूद स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और इसकी स्थायी प्रकृति अब भी लोगों को निर्णय लेने से पहले सोचने पर मजबूर करती है। त्वचा संबंधी समस्याओं और संक्रमण का डर भी कई लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।


