भोपाल। मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा की सेवानिवृत्ति की तारीख को लेकर चल रहा संशय खत्म हो गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मकवाणा 30 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। गृह विभाग ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही प्रदेश के नए पुलिस प्रमुख की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। नए डीजीपी एक दिसंबर को कार्यभार संभालेंगे। अगला पुलिस प्रमुख कौन होगा, इसे लेकर अब सबकी नजरें यूपीएससी के पैनल और राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हैं।
यूपीएससी को भेजे गए 12 आईपीएस अधिकारियों के नाम
1988 बैच के आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाणा को दिसंबर 2024 में मध्यप्रदेश का डीजीपी नियुक्त किया गया था। गृह विभाग के आदेश के मुताबिक, वे 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2006 और 2018 के फैसलों का भी उल्लेख किया गया है।
मकवाणा की सेवानिवृत्ति की तारीख तय होने से पहले पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) और शासन के बीच उनके कार्यकाल को लेकर चर्चा हुई थी। बताया गया कि पीएचक्यू ने गृह विभाग को प्रस्ताव भेजकर उनका कार्यकाल दो दिसंबर 2026 तक बढ़ाने का सुझाव दिया था। इसके पीछे उनकी जॉइनिंग की तारीख और डीजीपी के लिए निर्धारित दो साल के कार्यकाल का तर्क दिया गया था। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक भी पहुंचा। इसके बाद सरकार ने 30 नवंबर को ही उनकी सेवानिवृत्ति तय करते हुए आदेश जारी कर दिया।
वरुण कपूर, उपेंद्र जैन और प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के नाम चर्चा में
मध्यप्रदेश के अगले डीजीपी के चयन के लिए राज्य सरकार 12 आईपीएस अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेज चुकी है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) तीन अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेजेगा। इसके बाद सरकार नए पुलिस महानिदेशक के नाम पर अंतिम फैसला करेगी।
संभावित दावेदारों में जेल विभाग के महानिदेशक वरुण कपूर, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के प्रमुख उपेंद्र जैन और होमगार्ड की महानिदेशक प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। हालांकि, इनमें से किस अधिकारी को प्रदेश के पुलिस बल की कमान सौंपी जाएगी, यह यूपीएससी के पैनल और राज्य सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
डीजीपी चयन में छह महीने की सेवा अवधि अहम
नए डीजीपी की नियुक्ति में अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की तारीख भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, डीजीपी पद पर नियुक्ति के लिए संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने की सेवा अवधि शेष होनी चाहिए।
इसी प्रावधान के चलते वरुण कपूर की दावेदारी पर भी नजरें टिकी थीं। यदि मकवाणा की सेवानिवृत्ति की तारीख दिसंबर तक बढ़ाई जाती, तो कपूर की शेष सेवा अवधि के आधार पर उनकी पात्रता को लेकर सवाल उठ सकते थे। अब मकवाणा की सेवानिवृत्ति की तारीख स्पष्ट होने के बाद नए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया पर निगाहें हैं।


