भोपाल। मध्यप्रदेश में दूध से बने असली डेयरी उत्पादों की आड़ में एनालॉग पनीर और मावा बेचने वालों पर सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने एनालॉग पनीर और एनालॉग मावा के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
खाद्य सुरक्षा आयुक्त सुखवीर सिंह ने बुधवार को आदेश जारी कर प्रदेशभर में इस तरह के उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया। हालांकि, यह रोक फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे मानकीकृत उत्पादों पर लागू नहीं होगी।
विभाग के मुताबिक कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना और उन्हें असली डेयरी उत्पाद तथा एनालॉग उत्पाद के बीच स्पष्ट अंतर की जानकारी देना है।
पनीर के नाम पर बेचे जा रहे थे एनालॉग उत्पाद
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में सामने आया कि कई कारोबारी एनालॉग उत्पादों को पनीर, मलाई पनीर, फ्रेश पनीर, कॉटेज ब्लॉक और दूसरे नामों से बेच रहे थे। कई मामलों में लेबलिंग और पैकेजिंग पर उत्पाद की वास्तविक प्रकृति की पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही थी।
इससे उपभोक्ताओं के भ्रमित होने की स्थिति बन रही थी और उन्हें यह पता नहीं चल पा रहा था कि वे वास्तविक डेयरी उत्पाद खरीद रहे हैं या दूध के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होने वाले गैर-डेयरी उत्पाद।
गैर-डेयरी सामग्री वाले उत्पादों पर भी कार्रवाई
आदेश के अनुसार ऐसे सभी एनालॉग या गैर-डेयरी खाद्य उत्पाद प्रतिबंधित रहेंगे, जो किसी डेयरी उत्पाद की नकल करते हैं या उपभोक्ताओं को उन्हें वास्तविक डेयरी उत्पाद समझने का आभास देते हैं।
खास तौर पर ऐसे उत्पादों पर कार्रवाई होगी, जिनमें दूध की जगह वनस्पति वसा, वनस्पति तेल या अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है और जिनकी लेबलिंग, पैकेजिंग या बिक्री का तरीका उपभोक्ताओं को भ्रमित करता है।
पनीर के 821 सैंपल में 132 अमानक मिले
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार वर्ष 2025-26 में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला में पनीर के 821 रेगुलेटरी सैंपल जांच के लिए भेजे गए। इनमें से 132 सैंपल अमानक पाए गए।
इनमें 78 सैंपल की बीआर रीडिंग और 54 सैंपल में फैट प्रतिशत निर्धारित पनीर मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।
विभाग ने इसे पनीर के निर्धारित मानकों के पालन में कमी और कुछ मामलों में एनालॉग पनीर के इस्तेमाल की संभावना से जोड़कर देखा है। इसके बाद एनालॉग पनीर और मावा के खिलाफ कार्रवाई को और सख्त किया गया है।
उपभोक्ताओं को भ्रम से बचाने पर जोर
सरकार का कहना है कि कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के साथ-साथ बाजार में बिक रहे डेयरी उत्पादों की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट करना है। खाद्य सुरक्षा विभाग अब ऐसे उत्पादों की निर्माण से लेकर बिक्री तक की पूरी श्रृंखला पर निगरानी बढ़ाएगा।


