बैतूल। राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने मध्य प्रदेश के बैतूल में आयोजित जनजातीय महासम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य तभी सफल होगा, जब देश की प्रगति अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण जैसे मूल्यों पर आधारित होगी। उन्होंने जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति संरक्षण की भावना को पूरे देश के लिए प्रेरणादायक बताया।
ब्रह्मकुमारीज के जनजातीय महासम्मेलन का किया शुभारंभ
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को बैतूल के Lal Bahadur Shastri Stadium में ब्रह्मकुमारीज संस्थान द्वारा आयोजित “आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन में शामिल हुईं। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान से हुई। इस अवसर पर राष्ट्रपति का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने समारोह को विशेष बना दिया।
आध्यात्मिक शिक्षा से समाज में आता है सकारात्मक बदलाव
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा व्यक्ति के जीवन में शांति, संतुलन और नई ऊर्जा का संचार करती है। इससे न केवल व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और आपसी सद्भाव को भी बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाकर समाज को नई दिशा दी जा सकती है और राष्ट्र निर्माण को मजबूत आधार प्रदान किया जा सकता है।
जनजातीय समाज की संस्कृति और मूल्यों की सराहना
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जनजातीय समाज ने अपनी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और जीवन मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। उनके जीवन में सहयोग, संवेदनशीलता, ईमानदारी और सामुदायिक भावना जैसे गुण गहराई से जुड़े हुए हैं, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय का जल, जंगल और जमीन के प्रति संरक्षण का दृष्टिकोण वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक आदर्श मॉडल है।
पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान
राष्ट्रपति ने अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति जनजातीय समाज का सम्मान और संतुलित जीवनशैली आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है।
अटल बिहारी वाजपेयी को किया याद
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के प्रसिद्ध कथन, “भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश का हर क्षेत्र भारत की आत्मा का हिस्सा है और विकसित भारत के निर्माण में सभी समुदायों की समान भागीदारी आवश्यक है।
2047 के विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यह महासम्मेलन जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और आध्यात्मिक जागरूकता को नई दिशा देगा। उन्होंने सभी नागरिकों से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।


