नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय संकट से जूझ रहे कर्नाटक के गोकाक स्थित श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति, पूंजी की कमी और नियामकीय मानकों का पालन न करने के कारण यह सख्त कदम उठाया है।
RBI ने कहा कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और भविष्य में आय अर्जित करने की संभावनाएं नहीं बची हैं। मौजूदा परिस्थितियों में बैंक अपने जमाकर्ताओं की पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं था, इसलिए बैंक का संचालन जारी रखना ग्राहकों के हितों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता था।
तत्काल प्रभाव से बंद हुई बैंकिंग सेवाएं
लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक को तत्काल प्रभाव से सभी बैंकिंग गतिविधियां बंद करने का निर्देश दिया गया है। अब बैंक न तो नई जमा स्वीकार कर सकेगा और न ही ग्राहकों को भुगतान कर पाएगा। RBI ने कर्नाटक के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से बैंक के परिसमापन (Liquidation) और परिसमापक नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है।
97.9% जमाकर्ताओं को मिलेगी पूरी जमा राशि
RBI के मुताबिक, बैंक के परिसमापन की स्थिति में लगभग 97.9 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी जमा राशि का पूरा भुगतान मिल जाएगा। यह भुगतान डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत उपलब्ध बीमा सुरक्षा के माध्यम से किया जाएगा।
DICGC बैंक जमाओं पर निर्धारित सीमा तक बीमा कवर प्रदान करता है, जिससे अधिकांश छोटे और मध्यम जमाकर्ताओं के हित सुरक्षित रहते हैं।
सहकारी बैंकों पर RBI की सख्ती जारी
हाल के वर्षों में RBI ने वित्तीय रूप से कमजोर सहकारी बैंकों पर निगरानी और नियामकीय कार्रवाई तेज कर दी है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा और बैंकिंग प्रणाली में भरोसा बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


