तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और सैन्य संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों के बीच एक अंतरिम शांति समझौते (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके बाद युद्धविराम प्रभावी हो गया है। इस समझौते के तहत ईरान में संघर्ष समाप्त करने, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने पर सहमति बनी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने तेहरान से डिजिटल माध्यम के जरिए दस्तावेज को मंजूरी दी। समझौते की घोषणा के तुरंत बाद इसे लागू कर दिया गया।
समझौते में क्या-क्या शामिल है?
सूत्रों के मुताबिक, शांति समझौते के मसौदे में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है। इनमें युद्ध समाप्त करना, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बहाल करना, तेल निर्यात को सामान्य करना, कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और जमे हुए वित्तीय संसाधनों को लेकर चर्चा शामिल है।
इसके अलावा लेबनान में जारी संघर्ष को कम करने और क्षेत्र में स्थिरता कायम करने पर भी जोर दिया गया है।
ट्रम्प बोले- मिशन पूरा हुआ
समझौते के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि उनका लक्ष्य ईरान के साथ संघर्ष समाप्त करना, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने अपने रणनीतिक उद्देश्यों को उम्मीद से बेहतर तरीके से हासिल किया है।
हालांकि ट्रम्प ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान समझौते की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो अमेरिका सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
चीन ने किया स्वागत
चीन ने इस समझौते का स्वागत करते हुए दोनों पक्षों से युद्धविराम का पूरी तरह सम्मान करने की अपील की है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए समझौते का पालन बेहद जरूरी है। चीन ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए मानवीय सहायता देने की भी घोषणा की है।
ईरानी संसद की चेतावनी
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका अपने वादों और प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तो ईरान भी समझौते की शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं होगा। उनका बयान बताता है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
वैश्विक नजरें समझौते के क्रियान्वयन पर
हालांकि समझौते को पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी प्रतिबद्धताओं का कितनी गंभीरता से पालन करते हैं। फिलहाल दुनिया की नजरें इस ऐतिहासिक समझौते और उसके प्रभावों पर टिकी हुई हैं।


