देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों की साप्ताहिक छुट्टी को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब मान्यता प्राप्त मदरसों में शुक्रवार की जगह रविवार को अवकाश रहेगा। राज्य सरकार ने यह कदम शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाने और मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से उठाया है। हालांकि, शुक्रवार को जुमे की नमाज के लिए आधे दिन की छुट्टी देने की मांग भी उठने लगी है। कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे ध्रुवीकरण की राजनीति से जोड़ा है।
मदरसों में भी स्कूलों जैसे नियम
सरकार के निर्देश के मुताबिक, मान्यता प्राप्त मदरसों में साप्ताहिक अवकाश और शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन अन्य स्कूलों की तरह निर्धारित नियमों के अनुसार होगा। सरकार का तर्क है कि इससे विद्यार्थियों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप शिक्षा मिल सकेगी।
दूसरी ओर, मदरसों से जुड़े लोगों का कहना है कि शुक्रवार को जुमे की नमाज के लिए आधे दिन की छुट्टी की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को पढ़ाई के साथ धार्मिक गतिविधियों के लिए भी समय मिल सकेगा।
मदरसा बोर्ड की जगह शिक्षा प्राधिकरण
उत्तराखंड सरकार ने राज्य मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू की है। यह व्यवस्था एक जुलाई 2026 से प्रभावी हुई। इसके तहत मुस्लिम समुदाय के अलावा सिख, जैन, बौद्ध और पारसी समुदायों के शिक्षण संस्थानों के लिए भी निर्धारित शैक्षणिक मानकों के अनुसार संचालन का प्रावधान है।
नई व्यवस्था के तहत मदरसों को स्कूल के रूप में मान्यता लेने के लिए निर्धारित शर्तें पूरी करनी होंगी। मान्यता प्राप्त संस्थानों के लिए शिक्षा विभाग और प्राधिकरण के नियमों का पालन अनिवार्य है। साप्ताहिक अवकाश भी इन्हीं नियमों का हिस्सा है।
452 मदरसों में से 76 को मान्यता
राज्य में पहले मदरसा बोर्ड से 452 मदरसों को मान्यता मिली हुई थी। नई व्यवस्था के तहत दोबारा आवेदन करने वाले संस्थानों में से अब तक 76 को स्कूल के रूप में मान्यता दी गई है। वहीं, 114 मदरसों के आवेदन शिक्षा विभाग में प्रक्रियाधीन हैं।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक, देहरादून में छह, हरिद्वार में 44, नैनीताल में दो और ऊधम सिंह नगर में 24 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
फैसले पर सियासत, जुमे की छुट्टी की मांग
सरकार इस बदलाव को शिक्षा व्यवस्था में समानता और शैक्षणिक मानकों के पालन से जोड़ रही है। वहीं, कांग्रेस ने फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे ध्रुवीकरण की राजनीति करार दिया है। शुक्रवार को जुमे की नमाज के लिए हाफ डे देने की मांग ने भी बहस को तेज कर दिया है।


