तेल अवीव। Israel Election 2026: इजराइल के संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर पकड़ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। शुरुआती रुझानों और एग्जिट पोल में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा। नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन और विपक्षी नेता गादी आइजनकोट के खेमे के बीच कड़ा मुकाबला है। ऐसे में अरब पार्टियां सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
इजराइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। शुरुआती मतगणना के एक चरण में नेतन्याहू के गठबंधन को 59 सीटें मिलने का अनुमान सामने आया, जबकि आइजनकोट के गठबंधन को 46 सीटें मिलने की संभावना जताई गई। अरब पार्टियों को 15 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया। हालांकि, अलग-अलग एग्जिट पोल में सीटों के आंकड़े अलग रहे हैं और अंतिम नतीजों की पुष्टि होना बाकी है।
पांच एग्जिट पोल में अलग-अलग तस्वीर
मतदान समाप्त होने के बाद आए पांच एग्जिट पोल में से तीन में नेतन्याहू के गठबंधन को बढ़त दिखाई गई, जबकि दो में दोनों खेमों के बीच बराबरी का अनुमान लगाया गया। कुछ अनुमानों में नेतन्याहू समर्थक गठबंधन को 50 से 52 सीटें और विपक्षी खेमे को 51 से 53 सीटें मिलने की संभावना जताई गई। इससे साफ है कि किसी भी पक्ष के लिए बहुमत जुटाना आसान नहीं होगा।
नेतन्याहू ने मजबूत दक्षिणपंथी सरकार पर दिया जोर
नेतन्याहू ने कहा कि उनकी लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उन्होंने मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने की जरूरत बताई और अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर सरकार का विरोध किया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर ईरान के खतरे को समाप्त करने की बात भी कही।
नेतन्याहू के विरोधियों ने इसके उलट सत्ता परिवर्तन की मांग की है। आइजनकोट ने कहा कि वह सभी इजराइलियों का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकार बनाने का प्रयास करेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने भी नई सरकार बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही है।
77.7 प्रतिशत मतदान, 1999 के बाद सबसे अधिक
इजराइल में इस चुनाव के दौरान 77.7 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह 1999 के बाद सबसे अधिक मतदान है। वर्ष 2022 के चुनाव में इसी समय तक 70.6 प्रतिशत मतदान हुआ था। अधिक मतदान के बावजूद किसी एक खेमे को स्पष्ट जनादेश मिलने के संकेत नहीं हैं।
अरब दल बन सकते हैं किंगमेकर
इजराइल में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करते, बल्कि राजनीतिक दलों को वोट देते हैं। सीटों के अनुपात के आधार पर संसद में प्रतिनिधित्व तय होता है। यदि कोई गठबंधन 61 सीटों तक नहीं पहुंचता, तो उसे अन्य दलों का समर्थन जुटाना पड़ता है।
ऐसे में अरब पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, उनके समर्थन से सरकार बनाना दोनों प्रमुख खेमों के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। यदि कोई पक्ष बहुमत जुटाने में विफल रहता है, तो सरकार गठन की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है और नए चुनाव की संभावना भी पैदा हो सकती है।


