मुंबई। फिल्म निर्माता और निर्देशक केसी बोकाडिया अभिनेता नाना पाटेकर को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर के जाने से उन्हें जीवन में पहली बार किसी अपने के बिछड़ने जैसा गहरा झटका लगा। नाना पाटेकर की अभिनय शैली को असाधारण बताते हुए बोकाडिया ने कहा कि उनके जैसा दूसरा अभिनेता मिलना मुश्किल है। उनका अभिनय आम आदमी के जीवन, व्यवहार और बोलचाल की सहज अभिव्यक्ति था, जिसे दर्शकों ने हमेशा पसंद किया।
एक साक्षात्कार में केसी बोकाडिया ने नाना पाटेकर के साथ अपने भावनात्मक जुड़ाव, उनके अभिनय की खासियत और फिल्म उद्योग में आए बदलावों पर बात की। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर की कमी कभी पूरी नहीं की जा सकती। उनका काम और उनकी यादें हमेशा दर्शकों के दिलों में जीवित रहेंगी।
आम आदमी के किरदारों में दिखती थी अभिनय की असली ताकत
केसी बोकाडिया के मुताबिक, फिल्म उद्योग में कई बड़े सितारे आए, लेकिन नाना पाटेकर की अभिनय शैली सबसे अलग थी। वे पर्दे पर आम आदमी के हाव-भाव, बोलचाल और व्यवहार को जिस स्वाभाविकता से प्रस्तुत करते थे, वह उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी।
उनके अभिनय में बनावट या दिखावा नहीं था। पटकथा और संवादों पर उनकी मजबूत पकड़ के साथ वास्तविक जीवन के अनुभवों की झलक भी दिखाई देती थी। यही वजह थी कि दर्शक उनके किरदारों से सहजता से जुड़ जाते थे।
नाना के निधन से लगा गहरा सदमा
नाना पाटेकर से अपने लगाव का जिक्र करते हुए बोकाडिया भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि किसी के जाने से उन्हें पहली बार इतना गहरा मानसिक आघात लगा है। उन्होंने नाना पाटेकर के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए बताया कि वे जल्द ही उनके घर जाकर उनकी पत्नी से मुलाकात करेंगे और अपना दुख साझा करेंगे।
बोकाडिया ने कहा कि एक महान कलाकार का जाना फिल्म जगत के लिए बड़ी क्षति है। कलाकार भले ही दुनिया से चला जाए, लेकिन उसका काम और उसकी यादें लोगों के बीच हमेशा बनी रहती हैं।
पारिवारिक फिल्मों की कमी से सिनेमाघरों से दूर हुए दर्शक
फिल्मों के बजाय टेलीविजन की ओर रुख करने के सवाल पर केसी बोकाडिया ने कहा कि सिनेमाघरों का माहौल पहले जैसा नहीं रहा। उनके मुताबिक, अच्छी पारिवारिक फिल्मों की कमी के कारण परिवार अब पहले की तरह थिएटर में फिल्में देखने नहीं जा रहे हैं।
उन्होंने अपने फिल्मी करियर के दौर को याद करते हुए कहा कि एक समय टिकट खिड़कियों पर फिल्म देखने वालों की लंबी कतारें लगती थीं। उनकी फिल्मों ‘प्यार झुकता नहीं’, ‘तेरी मेहरबानियां’, ‘आज का अर्जुन’, ‘फूल बने अंगारे’ और ‘लाल बादशाह’ को देखने के लिए सिनेमाघरों में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते थे।


